माँ कूष्मांडा

Sep 26, 2026 · 7m 55s
माँ कूष्मांडा
Description
नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाती हैं माँ कूष्मांडा, जिन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री कहा जाता है।

जब न आकाश था, न धरती थी, न दिन-रात का नामोनिशान था, तब उस घोर अंधकार में उनकी एक मंद मुस्कान से प्रकाश फैला और पूरी सृष्टि की रचना हुई। इसलिए उन्हें कूष्मांडा कहा गया। “कु” यानी छोटा, “उष्मा” यानी ऊर्जा, और “अंडा” यानी ब्रह्मांड।

आठ भुजाओं वाली माँ कूष्मांडा, सिंह पर सवार होकर कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा और जपमाला धारण करती हैं। उनका तेज इतना प्रखर है कि वे स्वयं सूर्यलोक में निवास करती हैं और वहीं से जीवन और ऊर्जा का संचार करती हैं।

कहा जाता है कि उनकी पूजा करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है। नवरात्रि के इस दिन माँ को कुम्हड़े का भोग अर्पित करने की परंपरा है।

तो जानिए कैसे माँ कूष्मांडा की मुस्कान से जगत की रचना हुई, और क्यों उन्हें जीवन और ऊर्जा की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

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Author Chimes
Organization Chimes - Kids Audio Stories
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