माँ चंद्रघंटा
Sep 26, 2026 ·
10m 55s
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Description
नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाती हैं माँ दुर्गा का दिव्य रूप, माँ चंद्रघंटा।
देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूरी होने के बाद जब महादेव विवाह के लिए सहमत हुए, तो उनकी भस्म-लिपटी, भूत-प्रेतों से घिरी बारात देखकर हर कोई भयभीत हो उठा। रानी मैना तक बेहोश हो गईं।
तभी देवी ने अपने तेजस्वी स्वरूप को प्रकट किया। सिंह पर सवार, दस भुजाओं वाली, और मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। दुर्गा माँ का यही स्वरूप माँ चंद्रघंटा कहलाया। उनसे प्रेरित होकर ही महादेव अपने सौम्य "कल्याणसुंदर" रूप में परिवर्तित हुए और विवाह एक मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ।
माँ चंद्रघंटा की पूजा से जीवन से भय और बाधाएँ दूर होती हैं। उनका स्वरूप साहस, आत्मबल और शांति का प्रतीक है।
तो जानिए कैसे माँ चंद्रघंटा ने भगवान शिव की बारात का माहौल बदलकर अपने विवाह को दिव्य बना दिया।
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देवी पार्वती की कठोर तपस्या पूरी होने के बाद जब महादेव विवाह के लिए सहमत हुए, तो उनकी भस्म-लिपटी, भूत-प्रेतों से घिरी बारात देखकर हर कोई भयभीत हो उठा। रानी मैना तक बेहोश हो गईं।
तभी देवी ने अपने तेजस्वी स्वरूप को प्रकट किया। सिंह पर सवार, दस भुजाओं वाली, और मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। दुर्गा माँ का यही स्वरूप माँ चंद्रघंटा कहलाया। उनसे प्रेरित होकर ही महादेव अपने सौम्य "कल्याणसुंदर" रूप में परिवर्तित हुए और विवाह एक मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ।
माँ चंद्रघंटा की पूजा से जीवन से भय और बाधाएँ दूर होती हैं। उनका स्वरूप साहस, आत्मबल और शांति का प्रतीक है।
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Information
| Author | Chimes |
| Organization | Chimes - Kids Audio Stories |
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