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<rss xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" xmlns:googleplay="http://www.google.com/schemas/play-podcasts/1.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>vidit-unofficial</title><link>https://www.spreaker.com/show/vidit-panchals-podcast_1</link><description><![CDATA[]]></description><atom:link href="https://www.spreaker.com/show/4284800/episodes/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><language>en</language><category>Society &amp; Culture</category><copyright>Copyright Vidit Panchal</copyright><image><url>https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/images.spreaker.com/cloudinary/s--As9mmdJk--/w_1000,h_800,c_fit,l_text:Lato_164_bold:vidit-unofficial/images.spreaker.com/default/show-1400x1400-20190801.jpg</url><title>vidit-unofficial</title><link>https://www.spreaker.com/show/vidit-panchals-podcast_1</link></image><lastBuildDate>Sat, 27 Feb 2021 17:21:28 +0000</lastBuildDate><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:owner><itunes:name>Vidit Panchal</itunes:name><itunes:email>feeds@spreaker.com</itunes:email></itunes:owner><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/images.spreaker.com/cloudinary/s--As9mmdJk--/w_1000,h_800,c_fit,l_text:Lato_164_bold:vidit-unofficial/images.spreaker.com/default/show-1400x1400-20190801.jpg"/><itunes:category text="Society &amp; Culture"/><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:type>episodic</itunes:type><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:email>feeds@spreaker.com</googleplay:email><googleplay:category text="Society &amp; Culture"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit><item><title>सफ़र में कभी</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/g</link><description><![CDATA[सफ़र में कभी<br /><br />जो ट्रेन के सफ़र में कभी-कभी<br />एक नदी बीच में आती है और<br />वो पतले-से पुल पर बड़े-बड़े लोहे के खाँचों से<br />हवा के कटने की जो आवाज़ें थरथरा देती हैं;<br />तुम उस वक़्त भी खिड़की से बाहर <br />एकटक, उस नदी का आख़िरी नज़ारा देखते रहते हो,<br />जैसे एक किनारा उसका तुमसे ही बाँध दिया हो<br />और मैं फ़क़त तुम्हे देखता रहता हूँ। <br /><br />थरथराहट बाक़ी मुसाफ़िरों के लिए है<br />तुम्हारे लिए नदी है, <br />मेरे लिए तुम हो। <br /><br />विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/40918004</guid><pubDate>Tue, 15 Sep 2020 18:39:37 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/40918004/draft_1600194273755610_audio.mp3" length="672496" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>सफ़र में कभी

जो ट्रेन के सफ़र में कभी-कभी
एक नदी बीच में आती है और
वो पतले-से पुल पर बड़े-बड़े लोहे के खाँचों से
हवा के कटने की जो आवाज़ें थरथरा देती हैं;
तुम उस वक़्त भी खिड़की से बाहर 
एकटक, उस नदी का आख़िरी नज़ारा देखते रहते हो,
जैसे एक किनारा उसका तुमसे...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[सफ़र में कभी<br /><br />जो ट्रेन के सफ़र में कभी-कभी<br />एक नदी बीच में आती है और<br />वो पतले-से पुल पर बड़े-बड़े लोहे के खाँचों से<br />हवा के कटने की जो आवाज़ें थरथरा देती हैं;<br />तुम उस वक़्त भी खिड़की से बाहर <br />एकटक, उस नदी का आख़िरी नज़ारा देखते रहते हो,<br />जैसे एक किनारा उसका तुमसे ही बाँध दिया हो<br />और मैं फ़क़त तुम्हे देखता रहता हूँ। <br /><br />थरथराहट बाक़ी मुसाफ़िरों के लिए है<br />तुम्हारे लिए नदी है, <br />मेरे लिए तुम हो। <br /><br />विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>43</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/fc3ae3b67915477b7dc81eb2e2ed40aa.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>सफ़र में कभी

जो ट्रेन के सफ़र में कभी-कभी
एक नदी बीच में आती है और
वो पतले-से पुल पर बड़े-बड़े लोहे के खाँचों से
हवा के कटने की जो आवाज़ें थरथरा देती हैं;
तुम उस वक़्त भी खिड़की से बाहर 
एकटक, उस नदी का आख़िरी नज़ारा देखते रहते हो,
जैसे एक किनारा उसका तुमसे ही बाँध दिया हो
और मैं फ़क़त तुम्हे देखता रहता हूँ। 

थरथराहट बाक़ी मुसाफ़िरों के लिए है
तुम्हारे लिए नदी है, 
मेरे लिए तुम हो। 

विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/fc3ae3b67915477b7dc81eb2e2ed40aa.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>जलसा</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/p_2</link><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/40503020</guid><pubDate>Wed, 26 Aug 2020 18:00:21 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/40503020/draft_1598464619403731_audio.mp3" length="1482501" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:duration>93</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/images.spreaker.com/cloudinary/s--As9mmdJk--/w_1000,h_800,c_fit,l_text:Lato_164_bold:vidit-unofficial/images.spreaker.com/default/show-1400x1400-20190801.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>प्रेमचंद के फटे जूते: परसाई जी</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/p_1</link><description><![CDATA[इसे सुनते समय आप कहीं कहीं हँस सकते हैं, फिर उसी हंसी के गूँज में खुदपर कटाक्ष भी कर सकते हैं।]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/40073285</guid><pubDate>Fri, 31 Jul 2020 12:43:56 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/40073285/draft_1596198576282388_audio.mp3" length="9380257" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>इसे सुनते समय आप कहीं कहीं हँस सकते हैं, फिर उसी हंसी के गूँज में खुदपर कटाक्ष भी कर सकते हैं।</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[इसे सुनते समय आप कहीं कहीं हँस सकते हैं, फिर उसी हंसी के गूँज में खुदपर कटाक्ष भी कर सकते हैं।]]></itunes:summary><itunes:duration>587</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/5769d706d1db63e754a4d90a31f0c41f.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>इसे सुनते समय आप कहीं कहीं हँस सकते हैं, फिर उसी हंसी के गूँज में खुदपर कटाक्ष भी कर सकते हैं।</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/5769d706d1db63e754a4d90a31f0c41f.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>दस्तक</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/c</link><description><![CDATA[दस्तक<br /><br />मैं कब तक रह सकता हूँ<br />अपने इस छोटे से कमरे में<br />जहाँ कुछ देर में काफी सवाल<br />दस्तक देने वाले हैं।<br />सोचूँ, <br />यही रुकूँ, बुलाऊँ उन्हें अंदर बड़े अदब से<br />बैठाउँ, बातें करूँ उनसे<br />और फिर रवाना कर दूं; <br />या फिर के के खोलूँ ही ना दरवाज़ा<br />लौटा दूँ बाहर से के फिर कभी आना, <br />बुरा मान जाएंगें मगर<br />बड़ी बेशर्मी से दुबारा आ जाएंगे। <br />या फिर उन्हें खटखटाने दूँ दरवाज़ा<br />और खिड़की से निकल जाऊँ<br />किसको पता चलने वाला है; <br />पता बदल लूं अपना ? <br />लेकिन कभी कभी लगता है,<br />मेज़ पर रखे जवाब उठाऊँ<br />और सरका दूँ उनकी तरफ<br />जब तक वो पढ़ेंगे उन्हें<br />मैं चल पडूंगा इस कमरे से बाहर <br />नए सवालों तक। <br /><br />-विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/25002025</guid><pubDate>Wed, 08 Apr 2020 16:08:18 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/25002025/draft_1586361623550074_audio.mp3" length="1652610" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>दस्तक

मैं कब तक रह सकता हूँ
अपने इस छोटे से कमरे में
जहाँ कुछ देर में काफी सवाल
दस्तक देने वाले हैं।
सोचूँ, 
यही रुकूँ, बुलाऊँ उन्हें अंदर बड़े अदब से
बैठाउँ, बातें करूँ उनसे
और फिर रवाना कर दूं; 
या फिर के के खोलूँ ही ना दरवाज़ा
लौटा दूँ बाहर से के...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[दस्तक<br /><br />मैं कब तक रह सकता हूँ<br />अपने इस छोटे से कमरे में<br />जहाँ कुछ देर में काफी सवाल<br />दस्तक देने वाले हैं।<br />सोचूँ, <br />यही रुकूँ, बुलाऊँ उन्हें अंदर बड़े अदब से<br />बैठाउँ, बातें करूँ उनसे<br />और फिर रवाना कर दूं; <br />या फिर के के खोलूँ ही ना दरवाज़ा<br />लौटा दूँ बाहर से के फिर कभी आना, <br />बुरा मान जाएंगें मगर<br />बड़ी बेशर्मी से दुबारा आ जाएंगे। <br />या फिर उन्हें खटखटाने दूँ दरवाज़ा<br />और खिड़की से निकल जाऊँ<br />किसको पता चलने वाला है; <br />पता बदल लूं अपना ? <br />लेकिन कभी कभी लगता है,<br />मेज़ पर रखे जवाब उठाऊँ<br />और सरका दूँ उनकी तरफ<br />जब तक वो पढ़ेंगे उन्हें<br />मैं चल पडूंगा इस कमरे से बाहर <br />नए सवालों तक। <br /><br />-विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>104</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/4859f4fb2ecaa6c7a59a961c0399eee4.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>दस्तक

मैं कब तक रह सकता हूँ
अपने इस छोटे से कमरे में
जहाँ कुछ देर में काफी सवाल
दस्तक देने वाले हैं।
सोचूँ, 
यही रुकूँ, बुलाऊँ उन्हें अंदर बड़े अदब से
बैठाउँ, बातें करूँ उनसे
और फिर रवाना कर दूं; 
या फिर के के खोलूँ ही ना दरवाज़ा
लौटा दूँ बाहर से के फिर कभी आना, 
बुरा मान जाएंगें मगर
बड़ी बेशर्मी से दुबारा आ जाएंगे। 
या फिर उन्हें खटखटाने दूँ दरवाज़ा
और खिड़की से निकल जाऊँ
किसको पता चलने वाला है; 
पता बदल लूं अपना ? 
लेकिन कभी कभी लगता है,
मेज़ पर रखे जवाब उठाऊँ
और सरका दूँ उनकी तरफ
जब तक वो पढ़ेंगे उन्हें
मैं चल पडूंगा इस कमरे से बाहर 
नए सवालों तक। 

-विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/4859f4fb2ecaa6c7a59a961c0399eee4.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>भोर से पहले</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/p</link><description><![CDATA[भोर से पहले... <br /><br />तैश में आकर भभक उठे दीपक<br />आखिर अपनी बाती की कालिख देख रहे हैं,<br />जो उनसे आशना होकर आए थे<br />वो सब पतंगे आसपास मृत पड़े है। <br />वायुवेग से दौड़ पड़े अश्व<br />अपने घुड़सवारों के रक्तरंजित शव,<br />अपनी काठी पर सजाए <br />गर्दन लटकाए अस्तबल को लौट चले हैं। <br />लहरें अपना खेल दिख कर<br />समुद्र के शून्य को लौट चलीं हैं<br />तट पर विनाश को अब<br />कुछ भी शेष नही है।<br />स्वयं अपने वेग से थककर<br />पवन, अब शयन को चली है,<br />उसकी चाल से उन्माद लेने वाले <br />ये वन, खलिहान, जलाशय सब सो चुके हैं। <br />देवालय सब शांत हैं<br />पटाक्षेप, निशक्त हैं;<br />उनके अहातों के सभी प्रार्थी<br />स्वप्न विहीन नींद में खोए है। <br />एक निर्वात सा है, शून्य सा<br />मानो प्रकृति पराजित सा महसूस करती हो<br />एक युग खो दिया हो उसने जैसे<br />और भोर से कुछ पहले आस लगाए बैठी हो<br />की सूर्य की पहली किरण के साथ,<br />युगांधर आएगा। <br /><br />-विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24857375</guid><pubDate>Sun, 05 Apr 2020 19:06:52 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24857375/draft_1586113431863794_audio.mp3" length="2143294" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>भोर से पहले... 

तैश में आकर भभक उठे दीपक
आखिर अपनी बाती की कालिख देख रहे हैं,
जो उनसे आशना होकर आए थे
वो सब पतंगे आसपास मृत पड़े है। 
वायुवेग से दौड़ पड़े अश्व
अपने घुड़सवारों के रक्तरंजित शव,
अपनी काठी पर सजाए 
गर्दन लटकाए अस्तबल को लौट चले हैं। 
लहरें...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[भोर से पहले... <br /><br />तैश में आकर भभक उठे दीपक<br />आखिर अपनी बाती की कालिख देख रहे हैं,<br />जो उनसे आशना होकर आए थे<br />वो सब पतंगे आसपास मृत पड़े है। <br />वायुवेग से दौड़ पड़े अश्व<br />अपने घुड़सवारों के रक्तरंजित शव,<br />अपनी काठी पर सजाए <br />गर्दन लटकाए अस्तबल को लौट चले हैं। <br />लहरें अपना खेल दिख कर<br />समुद्र के शून्य को लौट चलीं हैं<br />तट पर विनाश को अब<br />कुछ भी शेष नही है।<br />स्वयं अपने वेग से थककर<br />पवन, अब शयन को चली है,<br />उसकी चाल से उन्माद लेने वाले <br />ये वन, खलिहान, जलाशय सब सो चुके हैं। <br />देवालय सब शांत हैं<br />पटाक्षेप, निशक्त हैं;<br />उनके अहातों के सभी प्रार्थी<br />स्वप्न विहीन नींद में खोए है। <br />एक निर्वात सा है, शून्य सा<br />मानो प्रकृति पराजित सा महसूस करती हो<br />एक युग खो दिया हो उसने जैसे<br />और भोर से कुछ पहले आस लगाए बैठी हो<br />की सूर्य की पहली किरण के साथ,<br />युगांधर आएगा। <br /><br />-विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>134</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/9e309a4468c4ec7a9dc284867bca8e9a.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>भोर से पहले... 

तैश में आकर भभक उठे दीपक
आखिर अपनी बाती की कालिख देख रहे हैं,
जो उनसे आशना होकर आए थे
वो सब पतंगे आसपास मृत पड़े है। 
वायुवेग से दौड़ पड़े अश्व
अपने घुड़सवारों के रक्तरंजित शव,
अपनी काठी पर सजाए 
गर्दन लटकाए अस्तबल को लौट चले हैं। 
लहरें अपना खेल दिख कर
समुद्र के शून्य को लौट चलीं हैं
तट पर विनाश को अब
कुछ भी शेष नही है।
स्वयं अपने वेग से थककर
पवन, अब शयन को चली है,
उसकी चाल से उन्माद लेने वाले 
ये वन, खलिहान, जलाशय सब सो चुके हैं। 
देवालय सब शांत हैं
पटाक्षेप, निशक्त हैं;
उनके अहातों के सभी प्रार्थी
स्वप्न विहीन नींद में खोए है। 
एक निर्वात सा है, शून्य सा
मानो प्रकृति पराजित सा महसूस करती हो
एक युग खो दिया हो उसने जैसे
और भोर से कुछ पहले आस लगाए बैठी हो
की सूर्य की पहली किरण के साथ,
युगांधर आएगा। 

-विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/9e309a4468c4ec7a9dc284867bca8e9a.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>गर्मियाँ इस बार</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/k</link><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24789044</guid><pubDate>Fri, 03 Apr 2020 19:14:08 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24789044/draft_1585940783768405_audio.mp3" length="1688555" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:duration>106</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/413c76bdd2176ba27348a8042c33a011.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/413c76bdd2176ba27348a8042c33a011.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>तुम तक आते आते..</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/j</link><description><![CDATA[तुम तक...<br /><br />कोई रोकता है पीछे से, <br />कोई बाजू से कमीज खींच लेता है<br />तुम तक आते आते, आखिर रुक जाता हूँ मैं। <br /><br />कभी बत्ती गुल हो जाती है<br />कभी कभी रोशनी ढंक देती है<br />तुम्हे दिखते दिखते, आखिर छुप जाता हूं मैं।<br /><br />तुम इमारतों से नीचे नही उतरते<br />मैंने कभी पर्वत नही चढ़े<br />तुमसा ऊंचा उठते उठते, आखिर झुक जाता हूँ मैं।<br /><br />मैं नक्शों का एक्सपर्ट नहीं<br />ना दिशाओं का ही भान है<br />तुम्हे ढूंढते ढूंढते कोई, राह भटक जाता हूँ मैं।<br /><br />तेरे इत्र से महके महके <br />रहते मेरे सपने अक्सर<br />अपने सपनों में खोए खोये , बीच में उठ जाता हूँ मैं।<br /><br />हो दूर मगर तुम उतने ही,<br />जितना मृग कस्तूरी के<br />तुम तक आने की ख़्वाहिश में, आखिर थक जाता हूँ मैं। <br /><br />कुछ दिन बीतेंगे ऐसे ही<br />रुकते, छुपते, झुकते, थकते<br />कोई और तुम्हारी जगह ले तब तक, तुमपर ही टिक जाता हूँ मैं।<br /><br />विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24640557</guid><pubDate>Mon, 30 Mar 2020 16:48:47 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24640557/draft_1585585867775101_audio.mp3" length="2903562" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>तुम तक...

कोई रोकता है पीछे से, 
कोई बाजू से कमीज खींच लेता है
तुम तक आते आते, आखिर रुक जाता हूँ मैं। 

कभी बत्ती गुल हो जाती है
कभी कभी रोशनी ढंक देती है
तुम्हे दिखते दिखते, आखिर छुप जाता हूं मैं।

तुम इमारतों से नीचे नही उतरते
मैंने कभी पर्वत नही...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[तुम तक...<br /><br />कोई रोकता है पीछे से, <br />कोई बाजू से कमीज खींच लेता है<br />तुम तक आते आते, आखिर रुक जाता हूँ मैं। <br /><br />कभी बत्ती गुल हो जाती है<br />कभी कभी रोशनी ढंक देती है<br />तुम्हे दिखते दिखते, आखिर छुप जाता हूं मैं।<br /><br />तुम इमारतों से नीचे नही उतरते<br />मैंने कभी पर्वत नही चढ़े<br />तुमसा ऊंचा उठते उठते, आखिर झुक जाता हूँ मैं।<br /><br />मैं नक्शों का एक्सपर्ट नहीं<br />ना दिशाओं का ही भान है<br />तुम्हे ढूंढते ढूंढते कोई, राह भटक जाता हूँ मैं।<br /><br />तेरे इत्र से महके महके <br />रहते मेरे सपने अक्सर<br />अपने सपनों में खोए खोये , बीच में उठ जाता हूँ मैं।<br /><br />हो दूर मगर तुम उतने ही,<br />जितना मृग कस्तूरी के<br />तुम तक आने की ख़्वाहिश में, आखिर थक जाता हूँ मैं। <br /><br />कुछ दिन बीतेंगे ऐसे ही<br />रुकते, छुपते, झुकते, थकते<br />कोई और तुम्हारी जगह ले तब तक, तुमपर ही टिक जाता हूँ मैं।<br /><br />विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>182</itunes:duration><itunes:keywords>ambitions</itunes:keywords><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/9ae49e98390af2f4208de32eb048e5d9.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>तुम तक...

कोई रोकता है पीछे से, 
कोई बाजू से कमीज खींच लेता है
तुम तक आते आते, आखिर रुक जाता हूँ मैं। 

कभी बत्ती गुल हो जाती है
कभी कभी रोशनी ढंक देती है
तुम्हे दिखते दिखते, आखिर छुप जाता हूं मैं।

तुम इमारतों से नीचे नही उतरते
मैंने कभी पर्वत नही चढ़े
तुमसा ऊंचा उठते उठते, आखिर झुक जाता हूँ मैं।

मैं नक्शों का एक्सपर्ट नहीं
ना दिशाओं का ही भान है
तुम्हे ढूंढते ढूंढते कोई, राह भटक जाता हूँ मैं।

तेरे इत्र से महके महके 
रहते मेरे सपने अक्सर
अपने सपनों में खोए खोये , बीच में उठ जाता हूँ मैं।

हो दूर मगर तुम उतने ही,
जितना मृग कस्तूरी के
तुम तक आने की ख़्वाहिश में, आखिर थक जाता हूँ मैं। 

कुछ दिन बीतेंगे ऐसे ही
रुकते, छुपते, झुकते, थकते
कोई और तुम्हारी जगह ले तब तक, तुमपर ही टिक जाता हूँ मैं।

विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/9ae49e98390af2f4208de32eb048e5d9.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>मज़दूर</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/y</link><description><![CDATA[एक तुलना]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24554342</guid><pubDate>Sun, 29 Mar 2020 16:30:51 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24554342/draft_1585499028280595_audio.mp3" length="1169031" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>एक तुलना</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[एक तुलना]]></itunes:summary><itunes:duration>74</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/8e66aa3e6e8fda12afde010a42eebab8.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>एक तुलना</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/8e66aa3e6e8fda12afde010a42eebab8.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>गाते गाते</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/6-RRwHkZ</link><description><![CDATA[दुष्यंत कुमार]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24516284</guid><pubDate>Sat, 28 Mar 2020 18:35:17 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24516284/draft_1585420287498104_audio.mp3" length="2220199" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>दुष्यंत कुमार</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[दुष्यंत कुमार]]></itunes:summary><itunes:duration>139</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/8996b3bd570e7b9798989b9b5643b509.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>दुष्यंत कुमार</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/8996b3bd570e7b9798989b9b5643b509.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>तुम</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/b</link><description><![CDATA[इस पर्दे के पार से थोड़े<br />धुंधले दिखते हो तुम<br />पर्दा तो ये सूती है पर<br />रेशम लगते हो तुम । <br /><br />तुम आते हो और <br />रंग बदल जाता है मेरे चेहरे का<br />है जिसमे मेरी दुनिया खुश<br />वो मौसम लगते हो तुम। <br /><br />मुझतक आती है हवा जो अब<br />सुगंध सुहानी लाती है<br />हवा का अपना इत्र है या<br />महकते रहते हो तुम ?<br /><br />मैं छत पर बैठा रातों में <br />जब ऊपर देखा करता हूँ<br />तारे से तारा जोड़ता हूँ और<br />बनते रहते हो तुम। <br /><br />नपी-तुली एक दूरी पर<br />हम रहते है एक दूजे से<br />मुझे बताओ, क्या तब भी<br />मेरी धड़कन सुनते हो तुम? <br /><br />मैं शायद तुमसे कभी नही<br />कह सकूँगा ये बातें मिलकर<br />मेरे सिरहाने दबी हुई <br />डायरी में रहते हो तुम। <br /><br />-विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24436816</guid><pubDate>Fri, 27 Mar 2020 18:28:03 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24436816/draft_1585333383105920_audio.mp3" length="1896280" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>इस पर्दे के पार से थोड़े
धुंधले दिखते हो तुम
पर्दा तो ये सूती है पर
रेशम लगते हो तुम । 

तुम आते हो और 
रंग बदल जाता है मेरे चेहरे का
है जिसमे मेरी दुनिया खुश
वो मौसम लगते हो तुम। 

मुझतक आती है हवा जो अब
सुगंध सुहानी लाती है
हवा का अपना इत्र है या...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[इस पर्दे के पार से थोड़े<br />धुंधले दिखते हो तुम<br />पर्दा तो ये सूती है पर<br />रेशम लगते हो तुम । <br /><br />तुम आते हो और <br />रंग बदल जाता है मेरे चेहरे का<br />है जिसमे मेरी दुनिया खुश<br />वो मौसम लगते हो तुम। <br /><br />मुझतक आती है हवा जो अब<br />सुगंध सुहानी लाती है<br />हवा का अपना इत्र है या<br />महकते रहते हो तुम ?<br /><br />मैं छत पर बैठा रातों में <br />जब ऊपर देखा करता हूँ<br />तारे से तारा जोड़ता हूँ और<br />बनते रहते हो तुम। <br /><br />नपी-तुली एक दूरी पर<br />हम रहते है एक दूजे से<br />मुझे बताओ, क्या तब भी<br />मेरी धड़कन सुनते हो तुम? <br /><br />मैं शायद तुमसे कभी नही<br />कह सकूँगा ये बातें मिलकर<br />मेरे सिरहाने दबी हुई <br />डायरी में रहते हो तुम। <br /><br />-विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>119</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>इस पर्दे के पार से थोड़े
धुंधले दिखते हो तुम
पर्दा तो ये सूती है पर
रेशम लगते हो तुम । 

तुम आते हो और 
रंग बदल जाता है मेरे चेहरे का
है जिसमे मेरी दुनिया खुश
वो मौसम लगते हो तुम। 

मुझतक आती है हवा जो अब
सुगंध सुहानी लाती है
हवा का अपना इत्र है या
महकते रहते हो तुम ?

मैं छत पर बैठा रातों में 
जब ऊपर देखा करता हूँ
तारे से तारा जोड़ता हूँ और
बनते रहते हो तुम। 

नपी-तुली एक दूरी पर
हम रहते है एक दूजे से
मुझे बताओ, क्या तब भी
मेरी धड़कन सुनते हो तुम? 

मैं शायद तुमसे कभी नही
कह सकूँगा ये बातें मिलकर
मेरे सिरहाने दबी हुई 
डायरी में रहते हो तुम। 

-विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>रंग</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/h</link><description><![CDATA[रंग<br /><br />कौनसे रंग का दिल है तेरा<br />क्या चाहता है?<br /><br />कभी पर्वत चढ़कर सुस्ताना<br />उड़ जाना बिना सांस लिए<br />कभी आंसू से ब्रश भीगोकर<br />पूरा दिन रंग जाना अपना<br />कौन से रंग का दिल है तेरा....<br /><br />दौड़ पड़ना कभी <br />कोई कटी पतंग लूटने<br />कभी बस निहारते रहना आसमान को<br />शाम में ढलते हुए<br />कौन से रंग का दिल है तेरा....<br /><br />कभी धड़कना हर धड़कन के लिए<br />कभी किसी की मुस्कान पे थम जाना<br />कभी हठ करना मन से ही<br />कभी खुद को उसे सौंप जाना<br />कौनसे रंग का दिल है तेरा...<br /><br />हैं इतने रंग समाये इसमें<br />खुद इससे भी न सँभलते अक्सर<br />खुद को समेटना इसे आया नहीं कभी<br />और बिखर कर घुलना भी रास न आया<br /><br />सूखने तक जो बाकि रह जाये..<br />शायद वही रंग हो इसका<br />वैसे तब तक<br />नए रंग तलाशने में मसरूफ जरूर है ये। <br /><br />-विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24390680</guid><pubDate>Thu, 26 Mar 2020 18:27:15 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24390680/draft_1585246818969054_audio.mp3" length="2721750" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>रंग

कौनसे रंग का दिल है तेरा
क्या चाहता है?

कभी पर्वत चढ़कर सुस्ताना
उड़ जाना बिना सांस लिए
कभी आंसू से ब्रश भीगोकर
पूरा दिन रंग जाना अपना
कौन से रंग का दिल है तेरा....

दौड़ पड़ना कभी 
कोई कटी पतंग लूटने
कभी बस निहारते रहना आसमान को
शाम में ढलते हुए...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[रंग<br /><br />कौनसे रंग का दिल है तेरा<br />क्या चाहता है?<br /><br />कभी पर्वत चढ़कर सुस्ताना<br />उड़ जाना बिना सांस लिए<br />कभी आंसू से ब्रश भीगोकर<br />पूरा दिन रंग जाना अपना<br />कौन से रंग का दिल है तेरा....<br /><br />दौड़ पड़ना कभी <br />कोई कटी पतंग लूटने<br />कभी बस निहारते रहना आसमान को<br />शाम में ढलते हुए<br />कौन से रंग का दिल है तेरा....<br /><br />कभी धड़कना हर धड़कन के लिए<br />कभी किसी की मुस्कान पे थम जाना<br />कभी हठ करना मन से ही<br />कभी खुद को उसे सौंप जाना<br />कौनसे रंग का दिल है तेरा...<br /><br />हैं इतने रंग समाये इसमें<br />खुद इससे भी न सँभलते अक्सर<br />खुद को समेटना इसे आया नहीं कभी<br />और बिखर कर घुलना भी रास न आया<br /><br />सूखने तक जो बाकि रह जाये..<br />शायद वही रंग हो इसका<br />वैसे तब तक<br />नए रंग तलाशने में मसरूफ जरूर है ये। <br /><br />-विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>171</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>रंग

कौनसे रंग का दिल है तेरा
क्या चाहता है?

कभी पर्वत चढ़कर सुस्ताना
उड़ जाना बिना सांस लिए
कभी आंसू से ब्रश भीगोकर
पूरा दिन रंग जाना अपना
कौन से रंग का दिल है तेरा....

दौड़ पड़ना कभी 
कोई कटी पतंग लूटने
कभी बस निहारते रहना आसमान को
शाम में ढलते हुए
कौन से रंग का दिल है तेरा....

कभी धड़कना हर धड़कन के लिए
कभी किसी की मुस्कान पे थम जाना
कभी हठ करना मन से ही
कभी खुद को उसे सौंप जाना
कौनसे रंग का दिल है तेरा...

हैं इतने रंग समाये इसमें
खुद इससे भी न सँभलते अक्सर
खुद को समेटना इसे आया नहीं कभी
और बिखर कर घुलना भी रास न आया

सूखने तक जो बाकि रह जाये..
शायद वही रंग हो इसका
वैसे तब तक
नए रंग तलाशने में मसरूफ जरूर है ये। 

-विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item><item><title>दिल मेरे</title><link>https://www.spreaker.com/user/10857621/m</link><description><![CDATA[दिल मेरे तू डर नही<br />जो सामने सहर नही<br />कुछ रास्तों पे चलने को <br />सूरज नही जरूरी ।<br /><br />कदम कदम सवाल कर<br />न धीमी अपनी चाल कर <br />जवाब ढूंढते हुए <br />रुकना नही जरूरी।<br /><br />तुझे थोड़ी जो थकान हो <br />और पास में मकान हो <br />रुक जा तू थोड़ी देर पर<br />बसना नही जरूरी ।<br /><br />रहता कहाँ था याद रख<br />कुछ ठोकरों का स्वाद चख<br />तोहफ़े में गर चोटें मिले<br />बचना नही जरूरी ।<br /><br />रुकना कहाँ है सोच मत<br />तू आत्मा को नोच मत<br />अपने ही ख्वाबों के लिए <br />बिकना नही जरूरी ।<br /><br />लोगों के पैर से उड़ी <br />धूल में है जिंदगी <br />आसमाँ को हर समय <br />तकना नही जरूरी।<br /><br />दिल मेरे,<br />थोड़ी देर में खुद ब खुद <br />आ जाएगी तेरी सहर<br />तू चाहे गर तो रोक ले <br />थोड़ी देर ये सफ़र,<br />जो शाम हो तो फिर कहीं <br />सिगड़ियों पे कुछ पका<br />बहती नदी के पानी मे <br />सफर के ज़ख्म दे डुबा;<br />रात की मांद में सुकून से<br />सो सितारे ओढ़ के<br />कल भी सफर है,उससे पहले <br />सोना है जरूरी। <br /><br />विदित]]></description><guid isPermaLink="false">https://api.spreaker.com/episode/24300573</guid><pubDate>Wed, 25 Mar 2020 17:39:43 +0000</pubDate><enclosure url="https://api.spreaker.com/download/episode/24300573/draft_1585157454429089_audio.mp3" length="2967510" type="audio/mpeg"/><itunes:author>Vidit Panchal</itunes:author><itunes:subtitle>दिल मेरे तू डर नही
जो सामने सहर नही
कुछ रास्तों पे चलने को 
सूरज नही जरूरी ।

कदम कदम सवाल कर
न धीमी अपनी चाल कर 
जवाब ढूंढते हुए 
रुकना नही जरूरी।

तुझे थोड़ी जो थकान हो 
और पास में मकान हो 
रुक जा तू थोड़ी देर पर
बसना नही जरूरी ।

रहता कहाँ था याद रख...</itunes:subtitle><itunes:summary><![CDATA[दिल मेरे तू डर नही<br />जो सामने सहर नही<br />कुछ रास्तों पे चलने को <br />सूरज नही जरूरी ।<br /><br />कदम कदम सवाल कर<br />न धीमी अपनी चाल कर <br />जवाब ढूंढते हुए <br />रुकना नही जरूरी।<br /><br />तुझे थोड़ी जो थकान हो <br />और पास में मकान हो <br />रुक जा तू थोड़ी देर पर<br />बसना नही जरूरी ।<br /><br />रहता कहाँ था याद रख<br />कुछ ठोकरों का स्वाद चख<br />तोहफ़े में गर चोटें मिले<br />बचना नही जरूरी ।<br /><br />रुकना कहाँ है सोच मत<br />तू आत्मा को नोच मत<br />अपने ही ख्वाबों के लिए <br />बिकना नही जरूरी ।<br /><br />लोगों के पैर से उड़ी <br />धूल में है जिंदगी <br />आसमाँ को हर समय <br />तकना नही जरूरी।<br /><br />दिल मेरे,<br />थोड़ी देर में खुद ब खुद <br />आ जाएगी तेरी सहर<br />तू चाहे गर तो रोक ले <br />थोड़ी देर ये सफ़र,<br />जो शाम हो तो फिर कहीं <br />सिगड़ियों पे कुछ पका<br />बहती नदी के पानी मे <br />सफर के ज़ख्म दे डुबा;<br />रात की मांद में सुकून से<br />सो सितारे ओढ़ के<br />कल भी सफर है,उससे पहले <br />सोना है जरूरी। <br /><br />विदित]]></itunes:summary><itunes:duration>186</itunes:duration><itunes:explicit>clean</itunes:explicit><itunes:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><itunes:episodeType>full</itunes:episodeType><googleplay:author>Vidit Panchal</googleplay:author><googleplay:description>दिल मेरे तू डर नही
जो सामने सहर नही
कुछ रास्तों पे चलने को 
सूरज नही जरूरी ।

कदम कदम सवाल कर
न धीमी अपनी चाल कर 
जवाब ढूंढते हुए 
रुकना नही जरूरी।

तुझे थोड़ी जो थकान हो 
और पास में मकान हो 
रुक जा तू थोड़ी देर पर
बसना नही जरूरी ।

रहता कहाँ था याद रख
कुछ ठोकरों का स्वाद चख
तोहफ़े में गर चोटें मिले
बचना नही जरूरी ।

रुकना कहाँ है सोच मत
तू आत्मा को नोच मत
अपने ही ख्वाबों के लिए 
बिकना नही जरूरी ।

लोगों के पैर से उड़ी 
धूल में है जिंदगी 
आसमाँ को हर समय 
तकना नही जरूरी।

दिल मेरे,
थोड़ी देर में खुद ब खुद 
आ जाएगी तेरी सहर
तू चाहे गर तो रोक ले 
थोड़ी देर ये सफ़र,
जो शाम हो तो फिर कहीं 
सिगड़ियों पे कुछ पका
बहती नदी के पानी मे 
सफर के ज़ख्म दे डुबा;
रात की मांद में सुकून से
सो सितारे ओढ़ के
कल भी सफर है,उससे पहले 
सोना है जरूरी। 

विदित</googleplay:description><googleplay:image href="https://d3wo5wojvuv7l.cloudfront.net/t_rss_itunes_square_1400/images.spreaker.com/original/052e2ae45fc6161ebe8dea9ec5c6151f.jpg"/><googleplay:explicit>No</googleplay:explicit></item></channel></rss>
